Monday, 29 January 2018

पीपुल्ज़ मीडिया की विशेष बैठक 30 जनवरी को लुधियाना में

मीडिया की मौजूदा स्थिति और समस्याओं पर होगा विशेष विचार 
लुधियाना29 जनवरी 2018: (जन मीडिया मंच)::
मीडिया में निरंतर सख्त मेहनत करने के बावजूद मीडिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा शोषण का शिकार है। डयूटी के समय और वेतन को लेकर इन पत्रकारों से अन्याय निरंतर जारी है। उनके लिए आवाज़ उठाना भी आसान नहीं क्यूंकि बड़े बड़े पत्रकार संगठन उनको शर्तों पर अपना सदस्य बनाते हैं और अन्य ट्रेड यूनियन उनकी समस्यायों को उठाने में सरगर्मी नहीं दिखा सकीं। इसी बीच कुछ ऐसी घटनाएं भी हुईं जिनमें समझौते की राह पकड़ने को मजबूर होना पड़ा। 
इस नाज़ुक हालात ने बहुत से सवाल खड़े किये हैं। आखिर क्या किया जाये? इस पर आपके सुझाव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस स्थिति को ले कर 
"पीपुल्ज़ मीडिया लिंक" की एक आवश्यक बैठक 30 जनवरी 2018 दिन मंगलवार को सुबह 10:45 पर भाई बाला चौंक, लुधियाना पर स्थित शहीद करतार सिंह सराभा पार्क में होगी। इस अवसर पर जन अधिकारों और जन समस्यायों के साथ एकजुटता दर्शाने के साथ साथ मीडिया जगत की मौजूदा स्थितियों पर भी चर्चा होगी और इस के लिए आवश्यक संघर्ष की रणनीति पर भी विचार होगा।  
                                                                          ---सम्पर्क: रेक्टर कथूरिया (9915322407) 

Monday, 8 January 2018

जन मीडिया मंच ने भी की रचना खैरा पर FIR की सख्त निंदा

इस FIR से सिस्टम के नापाक इरादे फिर बेनकाब हुए हैं 
लुधियाना: 7 जनवरी 2017: (जन मीडिया मंच)::
टविटर पर रचना खैरा का टवीट 
खोखला और जन विरोधी सिस्टम बेनक़ाब होता जा रहा है और सिस्टम को चलाने वाले बेशर्म तानाशाह  बनते जा रहे हैं। द ट्रिब्यून की पत्रकार रचना खेहरा के खिलाफ FIR ने एक बार फिर यही साबित किया है। "जन मीडिया मंच" इस FIR की सख्त निंदा करता है और इसके खिलाफ संघर्ष में एकजुट हुए संगठनों के साथ है। गौरतलब है कि UIDAI के डिप्टी डायरेक्टर ने ट्रिब्यून और उसकी रिपोर्टर रचना खैरा के खिलाफ FIR दर्ज करवाई है। रचना का कसूर बस इतना ही कि उसने अपनी एक रिपोर्ट में इस जन विरोधी और भ्रष्ट सिस्टम को बेनकाब किया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि एक गिरोह लोगों के आधार से जुड़ी हर निजी जानकारी मात्र 500/- रुपए में लोगों को मुहैया करवाता है। आधार और इसकी गोपनीयता पर दमगजे मारने वाले सिस्टम को हकीकत का इस तरह बाहर आना गवारा नहीं हुआ। लोगों की निजी ज़िंदगी के व्यक्तिगत स्टाईल को  तमाशा बना देने वाला यह सिस्टम अब पत्रकार रचना खैरा को कहर भरी नज़रों से देख रहा है। 

एक प्रसिद्ध अंग्रेजी दैनिक के मुताबिक इस FIR में अनिल कुमार, सुनील कुमार और राज का नाम भी शामिल है। उल्लेखनीय है कि खैरा ने ट्रिब्यून के लिए रिपोर्ट तैयार करते हुए इन्हीं लोगों से संपर्क किया था। 
इसी बीच क्राइम ब्रांच के संयुक्त आयुक्त आलोक कुमार ने एक ऍंग्रेज़ी दैनिक को बताया कि इस मामले में FIR दर्ज कर ली गई है और शुरुआती जांच भी शुरू हो गई है। यह FIR क्राइम ब्रांच की साइबर सेल द्धारा IPC की धारा 419, 420, 468 और 471 साथ ही IT एक्ट की धारा 66 और आधार एक्ट की धारा 36/37 के अंतर्गत FIR दर्ज की गई है। बड़े बड़े मामलों में कई कई वर्षों तक हरकत में न आने वाला सिस्टम इस मुद्दे पर बहुत तेज़ी से हरकत मैं आया है। यह पोल खुलने की बौखलाहट ही कही जा सकती है।मौजूदा सिस्टम को हिला देने वाली इस रिपोर्ट ने इस सिस्टम का बहुत कुछ बेनकाब जो कर दिया है। 
गौरतलब है कि इससे पहले UIDAI ने इस प्रकार की किसी भी जानकारी के लीक होने की खबरों को खारिज किया था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अब यह चौथी बार है जब UIDAI ने इस प्रकार की कार्रवाई की है। सबसे पहले समीर कोचर, देबयान रॉय (सीएनएन-न्यूज़18) और सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसाइटी पर भी UIDAI FIR करवा चुका है। जन मीडिया से जुडी हर बात इस सिस्टम को नागवार लगती है। 


आखिर ट्रिब्यून का कसूर क्या है? क्या किया है रचना खैरा ने? क्या था ट्रिब्यून की इस खबर में? कुछ संक्षिप्त सी चर्चा करते हैं इस रिपोर्ट की। द ट्रिब्यून की खबर में कहा गया था कि अगर आपको आधार डेटा चाहिए तो बस पेटीएम के माध्यम से 500/- रुपए देना होगा और 10 मिनट के अंदर आपको सारी जानकारी मिल जाएगी। इस खोजपूर्ण खबर के मुताबिक, एक ऐसा रैकेट है जो कि गेटवे नाम के माध्यम से आपको लॉग इन और पासवर्ड देग। इसके बाद आप किसी का भी आधार नंबर उसमें डालिए आपको उस नंबर पर उपलब्ध सारी जानकारियां मिल जाएगी। पिन कोड से लेकर मोबाइल नंबर और आपकी मेल आईडी तक। इसके बदले में आपको इसकी कीमत चुकानी होगी सिर्फ 500 रुपए।  इस तरह 500/- रुपयों के एक नॉट के बदले में कितने लोगों की व्यक्तिगत जानकारी चुराई जा चुकी होगी इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है। देश की सुरक्षा से जुड़े लोगों की जानकारी में कितने लोग सेंध लगा चुके होंगें इसका अनुमान भी कठिन होगा। 
रिपोर्ट बताते है कि यह रैकेट इतना संगठित तरीके से काम करता है कि आपको ये सिर्फ जानकारी ही नहीं देंगे बल्कि अगर आप किसी का भी आधार प्रिंट कराकर रखना चाहते हैं तो उसकी भी व्यवस्था कर रखी है इन लोगों ने। इस मकसद के लिए आपको 300/- और रुपए देने होंगे जिससे इस रैकेट के लोग आपको एक ऐसा सॉफ्टवेयर मुहैया कराएंगे जिसके जरिए आप आधार का प्रिंट भी निकाल सकते हैं। इन बातों से ये तो साफ हो गया होगा कि आपका आधार कितना सुरक्षित है।  डिजिटल इण्डिया और जो ग्रीन के बहाने से तरह तरह के तजुर्बे करने वाला यह सिस्टम किस तरह आपकी ज़िंदगी में तांकझांक करके खलल दाल सकता है शायद अभी इसका अनुमान न लगाया जा सके। 

Saturday, 6 January 2018

लुधियाना में धरना प्रदर्शनों पर लगाई रोक के खिलाफ़ भारी रोष

Sat, Jan 6, 2018 at 4:55 PM
जनवादी जनसंगठनों ने की विशेष बैठक 
रोक तुरन्त वापिस न लेने पर तीखे संघर्ष का ऐलान


लुधियाना: 6 जनवरी, 2018: (जन मीडिया मंच ब्यूरो)::
लोगों के अधिकारपूर्ण संघर्षों को कुचलने की साजिश तहत पुलिस कमिश्नरेट, लुधियाना के एरिया में डी.सी. लुधियाना के आदेशों पर पुलिस कमिश्नर लुधायना द्वारा धारा 144 लगाकर धरना-प्रदर्शनों पर रोक लगाने के खिलाफ़ जिले के बड़ी संख्या इंसाफपसंद जनवादी-जनसंगठनों ने आज मीटिंग करके सख्त निन्दा करते हुए इन आदेशों को वापिस लेने की माँग की है। संगठनों ने फैसला किया है कि 9 जनवरी को डी.सी. लुधियाना को संगठनों का प्रतिनिधि मण्डल मिलकर अपना पक्ष रखेगा और इन आदेशों को वापिस लेने की माँग करेगा। अगर ये आदेश वापिस न हुए तो इस खिलाफ़ तीखा संघर्ष करने का ऐलान भी किया गया। आज की यह बैठक बीबी अमर कौर यादगारी हाल में हुई जिसका संचालन शहीद भगत सिंह जी के भान्जे प्रोफेसर जगमोहन सिंह करते हैं। 
संगठनों का कहना है कि धरना-प्रदर्शनों के लिए सिर्फ एक स्थान तय कर देना किसी भी प्रकार जायज नहीं है बल्कि इसके पीछे जनआवाज़ कुचलने की हाकिमों की साजिश है। हालांकि यह रोक सरकारी कामकाज बेरोक चलाने, लोगों की सहूलत, अमन-कानून की विवस्था बनाए रखने के बहाने लगाई गई है। लेकिन वास्तविक निशाना अधिकार माँग रहे लोग हैं। संगठनों का कहना है कि यह रोक किसी भी प्रकार मानने योग्य नहीं है। धारा 144 लगाना संगठित होने, संघर्ष करने के बुनियादी जनवादी अधिकार पर हमला है। संगठनों का कहना है कि ऐसे आदेशों से जनसंघर्ष रुकने नहीं वाले बल्कि और तीखे ही होंगे। केन्द्रीय और राज्य स्तरों पर हुक्मरानों द्वारा धड़ा-धड़ काले कानून बनाए जा रहे हैं। पंजाब में भी जनसंघर्षों को दबाने की साजिश तले पंजाब सार्वजनिक व निजी जायदाद नुकसान रोकथाम कानून लागू कर दिया गया है और गुण्डागर्दी रोकने के बहाने नया काला कानून पकोका बी बनाने की तैयारी है। डिप्टी कमिश्नर और पुलिस कमिश्रर लुधियाना द्वारा जारी हुए हुक्म भी इसी दमनकारी प्रक्रिया का अंग हैं। 

संगठनों का कहना है कि अपनी समस्याएँ हल न होने पर लोगों को मज़बूरीवश विभिन्न सरकारी अधिकारियों के दफतरों, संसद-विधानसभा मैंम्बर, मेयर, काऊँसलर, थाना, चौंकी, सड़कों आदि पर प्रदर्शन करने पड़ते हैं। हकों के लिए इक्कठे होना और आवाज़ बुलन्द करना लोगों का जनवादी ही नहीं बल्कि संविधानिक हक भी है। भारतीय संविधान की धारा 19 के तहत लोगों को अपने विचारों और हकों के लिए संगठित होने वा संघर्ष करने की आज़ादी है। यह हुक्म लोगों के संवेधानिक व जनवादी अधिकार का हनन है।
आज की मीटिंग में जमहूरी अधिकार सभा के प्रो. जगमोहन सिंह, कारखाना मज़दूर यूनियन के लखविन्दर, पंजाब खेत मज़दूर सभा के गुलजार सिंह गोरिया, तर्कशील सोसाइटी के जसवंत जीरख, मज़दूर अधिकार संघर्ष अभियान के सुरिन्दर सिंह, इंकलाबी केन्द पंजाब के कंवलजीत खन्ना, सी.आई.टी.यू. के जगदीश चन्द, मोल्डर एण्ड स्टील वर्कर्ज यूनियन के का. जोहरी, टेक्सटाईल हौज़री कामगार यूनियन के राजविन्दर, आर.पी.एफ. के अवतार सिंह विर्क, पेंडू मज़दूर यूनियन (मशाल) के सुखदेव भूँदड़ी, कामागाटा मारू यादगारी कमेटी के जागर सिंह बद्दोवाल, जे.सी.टी.यू. के चमकौर सिंह, एटक के गुरनाम सिद्धु, मेडीकल प्रेक्टीशनर ऐसोसिएशन के सुरजीत सिंह, नौजवान भारत सभा की बिन्नी, आजाद निर्माण मज़दूर यूनियन के हरी सिंह साहनी, पीपलज मीडिया के रेक्टर कथूरिया, पंजाब सक्रीन की कार्तिका आदि शामिल थे। 

Monday, 24 April 2017

निगम कर्मचारियों ने भी की ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग

वेतन हर महीने की पहली तारीख को मिलना सुनिश्चित हो 
लुधियाना: 23 अप्रैल 2017: (ओंकार सिंह पूरी//जन मीडिया मंच):: 

मानवता के लिए उषा की किरण जगाने वाले हम,
शोषित, पीडित, दलित जनों का भाग्य बनाने वाले हम।
हम अपने श्रम सीकर से ऊसर में स्वर्ण उगा देंगे,
कंकड पत्थर समतल कर कांटों में फूल खिला देंगे। 

इस गीत के सुरीले बोल छावनी मौहल्ला में स्थित आर्य स्कूल की दीवारों से छन छन कर बाहर आ रहे थे। शब्दों में जान थी। अंदर जा कर देखा तो मज़दूरों का सम्मेलन चल रहा था। नगर निगम के जो कर्मचारी लुधियाना जैसे बड़े शहर को साफ़ सुथरा रखने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं उनका वार्षिक अधिवेशन चल रहा था। म्यूनिसिपल वर्करज यूनियन के सदस्य और अन्य लोग पूरे ध्यान से मंच से आ रही आवाज़ को सुन रहे थे। गीत के बाद मंच से बताया गया कि भारतीय मज़दूर संघ इस समय देश का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन संगठन बन चुका है। यह कोई पार्टी आयोजन नहीं बल्कि मज़दूर की भलाई के कानूनों को पढ़ने वाली कक्षा लग रही थी। एक एक बारीकी को बताया जा रहा था और समझा भी जा रहा था। मज़दूर की शक्ति क्या कुछ कर सकती है इनकी झलक इनके इरादों से देखी जा सकती थी। इनका आत्म विश्वास इनके चेहरों से साफ़ झलक रहा था। मेहनत की कमाई का नूर इनकी आँखों की चमक से नज़र आ रहा था। 
इस अधिवेशन में जहाँ संगठन के भविष्य में अपनाई जाने वाली रणनीति की चर्चा की जा रही थी वहीँ इस समय सामने खड़ी मांगों की भी चर्चा की गयी। केवल चर्चा ही नहीं इनको ज़ोरदार ढंग से उठाया भी गया। 
इस कार्यक्रम के मुख्य मेहमान करतार सिंह राठौर ने मीडिया से एक भेंट में बताया कि इस सरकार के दौर में भी अभी तक वही हो रहा है जो कांग्रेस सरकार के समय होता रहा है। यह सर्कार भी उन्ही पद चिन्हों पर चल रही है। संगठन ने मांग की कि शहर की बढ़ती हुई आबादी के हिसाब से बी एंड आर और बागबानी शाखा  में कर्मचारियों की नयी भर्ती की जाये। केंद्रीय कर्मचारियों की तरह वेतन आयोग की रिपोर्ट पंजाब सर्कार के कर्मचारियों पर भी लागू की जाये।  सेवा मुक्त और मृतक कर्मचारियों को उनका बकाया जल्द से जल्द किया जाये। निगम में गाड़ी चला रहे कर्मचारियों को ड्राईवर के तौर पर प्रमोट किया जाये। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तनख्वाह के भुगतान हर महीने की पहली तारीख को सुनिश्चित किया जाये। इसके साथ ही मांग की गयी ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाये। कर्मचारियों को यूनिफार्म बी समय पर दी जाये। साथ ही कैशलेस स्कीम को भी जल्द से जल्द लागू किया जाये। 
इस मौके पर विशेष तौर से शामिल हुईं वरिष्ठ डिप्टी मेयर सुनीता अग्रवाल ने मीडिया से एक भेंट में कहा कि हमारी नगर निगम के इन कर्मचारियों की मांगें भी बहुत छोटी छोटी हैं। हम पूरा प्रयास करते हैं की इन मांगों को जल्द से जल्द मान लिया जाये।  अगर फिर भी कोई दिक्क्त हो तो ये लोग कभी भी मुझे आ कर मिल सकते हैं। भारतीय मज़दूर संघ के कई अन्य सक्रिय कार्यकर्ता भी यहाँ मौजूद थे। कुल मिलकर यह एक सफल आयोजन था। इसका नारा था--देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम !


Wednesday, 5 October 2016

"इप्टा" के राष्ट्रिय अधिवेशन पर हमले की हर तरफ निंदा

हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग ने ज़ोर पकड़ा 
इंदौर: 4 अक्टूबर 2016: (प्रदीप शर्मा और जन मीडिया मंच ब्यूरो):
साम्प्रदायिक शक्तिया फिर अपने आकाओं की सेवा में सक्रिय है।  जन मुद्दों की तरफ ध्यान लेजाने वाला या इन  आवाज़ उठाने वाला इनका दुश्मन है। इप्टा के राष्ट्रीय अधिवेशन पर किया गया हमला यही बताता है कि यह लोग अभी भी किसी सफदर हाश्मी की जान लेने की ताक में हैं।
गौरतलब है कि भारतीय जन नाट्य संगठन (इप्टा) के 14वें राष्ट्रीय सम्मेलन में मंगलवार को उस वक्त विवाद की स्थिति बन गई, जब भारत स्वाभिमान संगठन के कार्यकर्ता तिरंगा लेकर विरोध करने पहुंचे। कार्यकर्ता चलते समारोह में मंच पर चढ़ गए और माइक छीनकर नारेबाजी की। इनको ज़रा भी शर्म नहीं आई कि जिनके खिलाफ वे तिरंगे को एक साज़िशी हथियार की तर्ज इस्तेमाल कर रहे हैं उस उन लोगों ने केवल तिरंगे के लिए ही नहीं देश के सभी वर्गों की खुशहाली के लिए अपनी ज़िंदगियाँ लगाई हैं। ये लोग अपनी गुंडागर्दी से नहीं हटे तो जवाब में इप्टा के कार्यकर्ताओं ने विरोध करने आए इन हमलावरों को धक्के मारकर बाहर निकाला। एक हमलावर की पिटाई का भी दावा किया गया है। इस पिटाई के बाद हमलावर भाग खड़े हुए। पता चला है कि हमलावरों की संख्या 50-60 थी और ये लोग कलाकारों के वेश में वहां पहुंचे जिस कारण इन लोगों पर एकदम शक नहीं गया। इप्टा  हमले का समय करीब पौने चार बजे बताया है। 

मिली सूचना के मुताबिक दोपहर बाद भारत स्वाभिमान संगठन के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए आनंद मोहन माथुर सभागृह पहुंचे। हॉल में बैठे दर्शकों को लगा कि यह नाटक का ही एक हिस्सा है, लेकिन कुछ ही देर बाद मंच पर पहुंचकर वे हंगामा करने लगे तो पता चला कि यह विरोध प्रदर्शन है। माइक छीनकर एक युवक ने सभी को भारत माता की जय बोलने को कहा। उसका कहना था आप लोग देशद्रोही कन्हैया के साथी हो। इधर, मंच के नीचे बैठे लोगों ने 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाना शुरू कर दिया। मंच पर बैठे कुछ वक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया तो इप्टा कार्यकर्ता भी भड़क गए। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई। मंच से उतरते ही हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने कुर्सियों पर बैठे युवकों से मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लात-घूसे चले। नाटक में नाटक करते हुए हमला सफल बनाने की साज़िश बुरी तरह से नाकाम हो गयी। पता नहीं चल सका कि अभी  ये लोग किस कलाकार को सफदर हाश्मी की तरह अपना निशाना बनाने आए थे। 
खबर आग की तरह सारे देश में फ़ैल गयी। लुधियाना "इप्टा" की तरफ से डॉक्टर अरुण मित्रा, डॉक्टर गुलज़ार पंधेर और एम  एस  भाटिया ने शाम को प्रेस बयान जारी करके इस की। कई  भी इसे गुंडागर्दी बताते हुए इसकी निंदा की।  परिसर से निकलने के बाद हमलावरों ने पथराव भी किया, जिसमें एक युवक घायल हो गया। इसी दौरान सड़क पर इप्टा का एक कार्यकर्ता दिखा तो उसकी पिटाई कर दी। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस पहुंची, तब तक मामला शांत हो चुका था। आयोजन खत्म होने तक सभागृह के बाहर पुलिस बल मौजूद रहा। रविवार को इप्टा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एमएस सथ्यु ने सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर टिप्पणी की थी। इससे हिंदूवादी संगठनों में नाराजगी है। शाम के पांच बजे के बाद कार्यक्रम दोबारा शुरू हो सका। कंवलजीत खन्ना, एडवोकेट एन  के जीत, निगम वर्करों के नेता विजय कुमार ने भी इस हमले की सख्त निंदा की है। कला के क्षेत्र में विरोध जताने का यह संघी स्टाईल अन्य जन संगठनों को भी आत्म रक्षा के लिए हथियार उठाने को मजबूर कर सकता है। अब देखना है कि हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज  होता है। 

Sunday, 13 March 2016

जारी है जनतक मुद्दों से ध्यान हटाने की साज़िश

किसी न किसी बहाने छुपाया जाता है जनता के असली गुनाहगारों को
...और अब ब्राहमलैंड?
बहुत पहले एक फिल्म आई थी धर्मा। फिल्म में प्राण होता है डाकू धर्म सिंह और डाका डालना है एक उस सेठ के घर से जिसने उसके साथ धोखा किया था। सेठ ने कर रखा है पुलिस का प्रबंध। डाकू रुकते हैं एक गैराज के सामने जो सेठ के घर के नज़दीक ही है और बहाना करते हैं जीप का कचरा साफ़ करवाने का। गैराज मालिक नवीन निश्चल फिल्म की कहानी में बना हुआ है डाकू धर्म सिंह का ही बेटा लेकिन दोनों बाप बेटा इस बात को नहीं जानते। वह डाकू धर्म सिंह से आ कर कचरा साफ़ करने के लिए मांगता है पांच हज़ार रूपये जिसके जवाब में धर्मा पूछता है कचरा साफ़ करने के पांच हज़ार रूपये? जवाब में वो कहता है कचरा साफ़ करने के नहीं पुलिस साफ़ करने के। सौदा हो जाता है।  नवीन निश्चल रिवाल्वर से फायर करता उसी जीप में इधर उधर हो जाता है और पुलिस उसे डाकू समझ कर उसके पीछे हो लेती है।  इसके बाद डाकू धर्म सिंह आसानी से अपने दुश्मन को अपना शिकार बना लेता है। ...और अब ब्राहमलैंड?
कुछ इसी तरह हो रहा है आजकल भी। बस डाकू और और आधुनिक डाकुओं के शिकार बदल गए हैं। एक समस्या खड़ी होती है तो दूसरी खड़ी कर दी जाती है और दूसरी जोर पकड़ती है  तो कोई तीसरा मामला खड़ा कर दिया जाता है।  इसे हाथ की सफाई कहो या जादूगरी कि बहुत ही सफाई से लोगों का ध्यान बार बार वास्तविक मुद्दों से हटा कर इधर उधर कर दिया जाता है। शायद कुछ दलों के नेताओं ने इस मकसद के लिए बाकायदा कुछ हॉल टाईमर भी रख छोड़े होंजो 24 घंटे सभी काम छोड़ कर उनका बचाव करने को तैयार रहते हैं। इस  तरह की फ़ोर्स आज के युग की ज़रूरत भी बन चुकी है। हवा पैदा करना और उसे अपने आका की मर्ज़ी के मुताबिक बहाना ही इस फ़ोर्स का काम होता है।  
नमूने के तौर बात करते हैं। सोशल मीडिया पर एक संदेश दिखा एक जानेमाने प्रकाशन ग्रुप में कि विकिलीक्स ने काले धन वालों की पहली सूची जारी की है जिसमें 24 नाम हैं। आरम्भिक जाँच में पता लगा कि कुछ दिन पहले इसी तरह की एक लिस्ट जारी हुई थी जिसमें कुछ कांग्रेसी नेताओं के नाम थे। इस लिए शायद बदला लेने के लिए किसी ने दूसरी लिस्ट जारी कर दी जिसमें भाजपा से सबंधित नेताओं के नाम थे। जब इस मामले को एक अन्य ग्रुप में रखा गया तो किसी मित्र ने झट से नई सूची जारी कर दी जिसमें वाम नेताओं के नाम थे क्यूंकि वाम सदस्य इस ग्रुप में उन्हें जवाब दे रहे थे।
अगर अंग्रेज़ों ने लोगों को हिन्दू- सिक्ख मुस्लिम और ईसाई  में बाँट दिया था तो आज के शातिर लोग जनता के इस बंटवारे को और आगे बढाते हुए लोगों को कांग्रेसी, अकाली या वामपंथी में बाँट रहे हैं। महंगाई, गरीबी, भूखमरी, हर रोज़ होती आत्म हत्याएं इन्हें मुद्दा नहीं लगती। हर गली मोहल्ले के मोड़ पर बिकता नशा इन्हें मुद्दा नहीं लगता। आये दिन होते रेप इनकी संवेदना नहीं जगाते। जनता पर होता लाठीचार्ज इन्हें महसूस नहीं होता।  सरेआम होती हत्याएं इनके  दिल को महसूस नहीं होतीं पर अगर किसी नेता से कोई पूछ ले कि आप ने तो चुनावों में यह वायदा किया था या वो वायदा किया था तो सारा ज़ोर उसे बचाने में लगा देते हैं।  किसी ने ठीक ही कहा है कि अपनी गलती पर हर कोई वकील बन जाता है और वो भी बहुत अच्छा लेकिन दुसरे की गलती पर वो सीधा जज बन जाता है। 
इस सारे जनून को शांत रख कर नव निर्माण में भागीदार होना कहीं अच्छा होता लेकिन बहस को उस तरफ ध्यान जाने ही नहीं दिया जाता। इस लिए एक निवेदन है किसी दिन खुले मंच पर बात हो।  सभी के सामने सभी अपने विचार रखें। जिसने भी बात करनी हो वो किसी का पीआरओ बन कर बात न करे।  बात आम जनता के दुःख की हो न कि किसी नेता के दल या छवि को पहुँचती कथित ठेस को लेकर। एक ही बात बार बार दोहराई न जाये। इस में दल और नेतागीरी से ऊपर उठ कर बहस करने वाले को सम्मानित किया जाये और राजनीति करने वाले को नज़र अंदाज़ किया जाये।  इसका लेख जोखा बहुत जल्द सभी के सामने होगा जिसका चयन बाकायदा एक कमेटी करे। 

Saturday, 3 October 2015

श्री मुक्तसर साहिब में धान की खरीद शुरू

डीसी ने कहा किसान फसल सुखा कर लाएं 
श्री मुक्तसर साहिब: 2 अक्टूबर 2015: (अनिल पनसेजा//पंजाब स्क्रीन):
श्री मुक्तसर साहिब की दाना मंडी में धान की खरीद श्री मुक्तसर साहिब के डिप्टी कमिश्नर जसकिरन  सिंह ने की। उनके साथ जिला फ़ूड सप्लाई, मार्कफेड के उच्च अधिकारी और मार्किट कमेटी के अधिकारी भी मौजूद थे।
पूरे भारत में धान की फसल पक्क कर मंडियों में पहुँच चुकी है। हर जगह के किसान अपनी फसल को लेकर मंडियो में आते हैं। हर किसान चाहता है कि उनकी फसल का अच्छा भाव मिले और उनकी फसल जल्दी ही बिक जाये और किसान जल्दी घर वापस जाये ता कि अगली फसल को बोने तियारी करे।  उसे जियादा दिन मंडी न बैठना पड़े इस लिए सरकार की तरफ से धान की फसल की खरीद एक अक्टूबर से शुरू करवा दी गयी है जिसके चलते आज श्री मुक्तसर साहिब की दाना मंडी में भी श्री मुक्त्सर साहिब के डिप्टी कमिश्नर स. जसकरण सिंह ने अपने साथ फ़ूड सप्लाई ,मार्क फेड और मंडी बोर्ड के अधिकारिओ को लेकर धान की फसल की खरीद शुरू करवाई उन्हों ने पात्र करो से बातचीत करते हुए बताया के इस बार किसानो को किसी भी किस्म की परेशानी का सहमना नही करना पड़ेगा फसल की जल्स तुलाई होगी और जल्द ही मॉल की लिफ्टिंग की जाएगी और किसान के पैसे की भी जल्द अदैगी की जाये गी इस के लिए सभी पर्बंध कर लिए गई है ........मगर हम किसानो से अपील करते है के धान की फसल को सुखा के मंडी में लाये और रात के समय धान न काटे ता के धान में नमी कम हो और उन्हें फसल बेचने में कोई दिकत न आये ........
दूसरी तरफ किसानो से पूछा तो उन्हों ने बताया के हमें तीन दिन हो गये अपनी फसल को मंडी में लेकर आये हुए अभी तक फसल की खिरिड नही हुई है और नहीं जहा को पानी आदि का पर्बंध है नहीं आवारा जानवरों के रोकथाम के लिए कोई पर्बंध है ...
 रूप सिंह किसान भंग्जडी और किसान बाल्टर सिंह तामकोट  मुश्किलें भी बतायीं। 
जब इस बारे में मार्किट कमेटी के सेकटरी से पूछा तो उन्हों ने बताया के हमने आवारा जानवरों को मंडी से बहर करने के लिए चार आदमियो को तैनात कर दिया है इस से किसानो की फसल का नुकसान नि होगा ......और किसानो के पिने वाले पानी का भी पर्बंध किया गिया है ..
सचिव गुरचरन सिंह ने अपने प्रबंधों के  बताया।