Monday, 24 April 2017

निगम कर्मचारियों ने भी की ठेकेदारी प्रथा समाप्त करने की मांग

वेतन हर महीने की पहली तारीख को मिलना सुनिश्चित हो 
लुधियाना: 23 अप्रैल 2017: (ओंकार सिंह पूरी//जन मीडिया मंच):: 

मानवता के लिए उषा की किरण जगाने वाले हम,
शोषित, पीडित, दलित जनों का भाग्य बनाने वाले हम।
हम अपने श्रम सीकर से ऊसर में स्वर्ण उगा देंगे,
कंकड पत्थर समतल कर कांटों में फूल खिला देंगे। 

इस गीत के सुरीले बोल छावनी मौहल्ला में स्थित आर्य स्कूल की दीवारों से छन छन कर बाहर आ रहे थे। शब्दों में जान थी। अंदर जा कर देखा तो मज़दूरों का सम्मेलन चल रहा था। नगर निगम के जो कर्मचारी लुधियाना जैसे बड़े शहर को साफ़ सुथरा रखने के लिए दिन रात मेहनत करते हैं उनका वार्षिक अधिवेशन चल रहा था। म्यूनिसिपल वर्करज यूनियन के सदस्य और अन्य लोग पूरे ध्यान से मंच से आ रही आवाज़ को सुन रहे थे। गीत के बाद मंच से बताया गया कि भारतीय मज़दूर संघ इस समय देश का सबसे बड़ा ट्रेड यूनियन संगठन बन चुका है। यह कोई पार्टी आयोजन नहीं बल्कि मज़दूर की भलाई के कानूनों को पढ़ने वाली कक्षा लग रही थी। एक एक बारीकी को बताया जा रहा था और समझा भी जा रहा था। मज़दूर की शक्ति क्या कुछ कर सकती है इनकी झलक इनके इरादों से देखी जा सकती थी। इनका आत्म विश्वास इनके चेहरों से साफ़ झलक रहा था। मेहनत की कमाई का नूर इनकी आँखों की चमक से नज़र आ रहा था। 
इस अधिवेशन में जहाँ संगठन के भविष्य में अपनाई जाने वाली रणनीति की चर्चा की जा रही थी वहीँ इस समय सामने खड़ी मांगों की भी चर्चा की गयी। केवल चर्चा ही नहीं इनको ज़ोरदार ढंग से उठाया भी गया। 
इस कार्यक्रम के मुख्य मेहमान करतार सिंह राठौर ने मीडिया से एक भेंट में बताया कि इस सरकार के दौर में भी अभी तक वही हो रहा है जो कांग्रेस सरकार के समय होता रहा है। यह सर्कार भी उन्ही पद चिन्हों पर चल रही है। संगठन ने मांग की कि शहर की बढ़ती हुई आबादी के हिसाब से बी एंड आर और बागबानी शाखा  में कर्मचारियों की नयी भर्ती की जाये। केंद्रीय कर्मचारियों की तरह वेतन आयोग की रिपोर्ट पंजाब सर्कार के कर्मचारियों पर भी लागू की जाये।  सेवा मुक्त और मृतक कर्मचारियों को उनका बकाया जल्द से जल्द किया जाये। निगम में गाड़ी चला रहे कर्मचारियों को ड्राईवर के तौर पर प्रमोट किया जाये। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तनख्वाह के भुगतान हर महीने की पहली तारीख को सुनिश्चित किया जाये। इसके साथ ही मांग की गयी ठेकेदारी प्रथा को समाप्त किया जाये। कर्मचारियों को यूनिफार्म बी समय पर दी जाये। साथ ही कैशलेस स्कीम को भी जल्द से जल्द लागू किया जाये। 
इस मौके पर विशेष तौर से शामिल हुईं वरिष्ठ डिप्टी मेयर सुनीता अग्रवाल ने मीडिया से एक भेंट में कहा कि हमारी नगर निगम के इन कर्मचारियों की मांगें भी बहुत छोटी छोटी हैं। हम पूरा प्रयास करते हैं की इन मांगों को जल्द से जल्द मान लिया जाये।  अगर फिर भी कोई दिक्क्त हो तो ये लोग कभी भी मुझे आ कर मिल सकते हैं। भारतीय मज़दूर संघ के कई अन्य सक्रिय कार्यकर्ता भी यहाँ मौजूद थे। कुल मिलकर यह एक सफल आयोजन था। इसका नारा था--देश के हित में करेंगे काम, काम के लेंगे पूरे दाम !


Wednesday, 5 October 2016

"इप्टा" के राष्ट्रिय अधिवेशन पर हमले की हर तरफ निंदा

हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग ने ज़ोर पकड़ा 
इंदौर: 4 अक्टूबर 2016: (प्रदीप शर्मा और जन मीडिया मंच ब्यूरो):
साम्प्रदायिक शक्तिया फिर अपने आकाओं की सेवा में सक्रिय है।  जन मुद्दों की तरफ ध्यान लेजाने वाला या इन  आवाज़ उठाने वाला इनका दुश्मन है। इप्टा के राष्ट्रीय अधिवेशन पर किया गया हमला यही बताता है कि यह लोग अभी भी किसी सफदर हाश्मी की जान लेने की ताक में हैं।
गौरतलब है कि भारतीय जन नाट्य संगठन (इप्टा) के 14वें राष्ट्रीय सम्मेलन में मंगलवार को उस वक्त विवाद की स्थिति बन गई, जब भारत स्वाभिमान संगठन के कार्यकर्ता तिरंगा लेकर विरोध करने पहुंचे। कार्यकर्ता चलते समारोह में मंच पर चढ़ गए और माइक छीनकर नारेबाजी की। इनको ज़रा भी शर्म नहीं आई कि जिनके खिलाफ वे तिरंगे को एक साज़िशी हथियार की तर्ज इस्तेमाल कर रहे हैं उस उन लोगों ने केवल तिरंगे के लिए ही नहीं देश के सभी वर्गों की खुशहाली के लिए अपनी ज़िंदगियाँ लगाई हैं। ये लोग अपनी गुंडागर्दी से नहीं हटे तो जवाब में इप्टा के कार्यकर्ताओं ने विरोध करने आए इन हमलावरों को धक्के मारकर बाहर निकाला। एक हमलावर की पिटाई का भी दावा किया गया है। इस पिटाई के बाद हमलावर भाग खड़े हुए। पता चला है कि हमलावरों की संख्या 50-60 थी और ये लोग कलाकारों के वेश में वहां पहुंचे जिस कारण इन लोगों पर एकदम शक नहीं गया। इप्टा  हमले का समय करीब पौने चार बजे बताया है। 

मिली सूचना के मुताबिक दोपहर बाद भारत स्वाभिमान संगठन के कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए आनंद मोहन माथुर सभागृह पहुंचे। हॉल में बैठे दर्शकों को लगा कि यह नाटक का ही एक हिस्सा है, लेकिन कुछ ही देर बाद मंच पर पहुंचकर वे हंगामा करने लगे तो पता चला कि यह विरोध प्रदर्शन है। माइक छीनकर एक युवक ने सभी को भारत माता की जय बोलने को कहा। उसका कहना था आप लोग देशद्रोही कन्हैया के साथी हो। इधर, मंच के नीचे बैठे लोगों ने 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारे लगाना शुरू कर दिया। मंच पर बैठे कुछ वक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार किया गया तो इप्टा कार्यकर्ता भी भड़क गए। इस दौरान धक्का-मुक्की हुई। मंच से उतरते ही हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने कुर्सियों पर बैठे युवकों से मारपीट शुरू कर दी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लात-घूसे चले। नाटक में नाटक करते हुए हमला सफल बनाने की साज़िश बुरी तरह से नाकाम हो गयी। पता नहीं चल सका कि अभी  ये लोग किस कलाकार को सफदर हाश्मी की तरह अपना निशाना बनाने आए थे। 
खबर आग की तरह सारे देश में फ़ैल गयी। लुधियाना "इप्टा" की तरफ से डॉक्टर अरुण मित्रा, डॉक्टर गुलज़ार पंधेर और एम  एस  भाटिया ने शाम को प्रेस बयान जारी करके इस की। कई  भी इसे गुंडागर्दी बताते हुए इसकी निंदा की।  परिसर से निकलने के बाद हमलावरों ने पथराव भी किया, जिसमें एक युवक घायल हो गया। इसी दौरान सड़क पर इप्टा का एक कार्यकर्ता दिखा तो उसकी पिटाई कर दी। घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस पहुंची, तब तक मामला शांत हो चुका था। आयोजन खत्म होने तक सभागृह के बाहर पुलिस बल मौजूद रहा। रविवार को इप्टा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एमएस सथ्यु ने सेना की सर्जिकल स्ट्राइक पर टिप्पणी की थी। इससे हिंदूवादी संगठनों में नाराजगी है। शाम के पांच बजे के बाद कार्यक्रम दोबारा शुरू हो सका। कंवलजीत खन्ना, एडवोकेट एन  के जीत, निगम वर्करों के नेता विजय कुमार ने भी इस हमले की सख्त निंदा की है। कला के क्षेत्र में विरोध जताने का यह संघी स्टाईल अन्य जन संगठनों को भी आत्म रक्षा के लिए हथियार उठाने को मजबूर कर सकता है। अब देखना है कि हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज  होता है। 

Sunday, 13 March 2016

जारी है जनतक मुद्दों से ध्यान हटाने की साज़िश

किसी न किसी बहाने छुपाया जाता है जनता के असली गुनाहगारों को
...और अब ब्राहमलैंड?
बहुत पहले एक फिल्म आई थी धर्मा। फिल्म में प्राण होता है डाकू धर्म सिंह और डाका डालना है एक उस सेठ के घर से जिसने उसके साथ धोखा किया था। सेठ ने कर रखा है पुलिस का प्रबंध। डाकू रुकते हैं एक गैराज के सामने जो सेठ के घर के नज़दीक ही है और बहाना करते हैं जीप का कचरा साफ़ करवाने का। गैराज मालिक नवीन निश्चल फिल्म की कहानी में बना हुआ है डाकू धर्म सिंह का ही बेटा लेकिन दोनों बाप बेटा इस बात को नहीं जानते। वह डाकू धर्म सिंह से आ कर कचरा साफ़ करने के लिए मांगता है पांच हज़ार रूपये जिसके जवाब में धर्मा पूछता है कचरा साफ़ करने के पांच हज़ार रूपये? जवाब में वो कहता है कचरा साफ़ करने के नहीं पुलिस साफ़ करने के। सौदा हो जाता है।  नवीन निश्चल रिवाल्वर से फायर करता उसी जीप में इधर उधर हो जाता है और पुलिस उसे डाकू समझ कर उसके पीछे हो लेती है।  इसके बाद डाकू धर्म सिंह आसानी से अपने दुश्मन को अपना शिकार बना लेता है। ...और अब ब्राहमलैंड?
कुछ इसी तरह हो रहा है आजकल भी। बस डाकू और और आधुनिक डाकुओं के शिकार बदल गए हैं। एक समस्या खड़ी होती है तो दूसरी खड़ी कर दी जाती है और दूसरी जोर पकड़ती है  तो कोई तीसरा मामला खड़ा कर दिया जाता है।  इसे हाथ की सफाई कहो या जादूगरी कि बहुत ही सफाई से लोगों का ध्यान बार बार वास्तविक मुद्दों से हटा कर इधर उधर कर दिया जाता है। शायद कुछ दलों के नेताओं ने इस मकसद के लिए बाकायदा कुछ हॉल टाईमर भी रख छोड़े होंजो 24 घंटे सभी काम छोड़ कर उनका बचाव करने को तैयार रहते हैं। इस  तरह की फ़ोर्स आज के युग की ज़रूरत भी बन चुकी है। हवा पैदा करना और उसे अपने आका की मर्ज़ी के मुताबिक बहाना ही इस फ़ोर्स का काम होता है।  
नमूने के तौर बात करते हैं। सोशल मीडिया पर एक संदेश दिखा एक जानेमाने प्रकाशन ग्रुप में कि विकिलीक्स ने काले धन वालों की पहली सूची जारी की है जिसमें 24 नाम हैं। आरम्भिक जाँच में पता लगा कि कुछ दिन पहले इसी तरह की एक लिस्ट जारी हुई थी जिसमें कुछ कांग्रेसी नेताओं के नाम थे। इस लिए शायद बदला लेने के लिए किसी ने दूसरी लिस्ट जारी कर दी जिसमें भाजपा से सबंधित नेताओं के नाम थे। जब इस मामले को एक अन्य ग्रुप में रखा गया तो किसी मित्र ने झट से नई सूची जारी कर दी जिसमें वाम नेताओं के नाम थे क्यूंकि वाम सदस्य इस ग्रुप में उन्हें जवाब दे रहे थे।
अगर अंग्रेज़ों ने लोगों को हिन्दू- सिक्ख मुस्लिम और ईसाई  में बाँट दिया था तो आज के शातिर लोग जनता के इस बंटवारे को और आगे बढाते हुए लोगों को कांग्रेसी, अकाली या वामपंथी में बाँट रहे हैं। महंगाई, गरीबी, भूखमरी, हर रोज़ होती आत्म हत्याएं इन्हें मुद्दा नहीं लगती। हर गली मोहल्ले के मोड़ पर बिकता नशा इन्हें मुद्दा नहीं लगता। आये दिन होते रेप इनकी संवेदना नहीं जगाते। जनता पर होता लाठीचार्ज इन्हें महसूस नहीं होता।  सरेआम होती हत्याएं इनके  दिल को महसूस नहीं होतीं पर अगर किसी नेता से कोई पूछ ले कि आप ने तो चुनावों में यह वायदा किया था या वो वायदा किया था तो सारा ज़ोर उसे बचाने में लगा देते हैं।  किसी ने ठीक ही कहा है कि अपनी गलती पर हर कोई वकील बन जाता है और वो भी बहुत अच्छा लेकिन दुसरे की गलती पर वो सीधा जज बन जाता है। 
इस सारे जनून को शांत रख कर नव निर्माण में भागीदार होना कहीं अच्छा होता लेकिन बहस को उस तरफ ध्यान जाने ही नहीं दिया जाता। इस लिए एक निवेदन है किसी दिन खुले मंच पर बात हो।  सभी के सामने सभी अपने विचार रखें। जिसने भी बात करनी हो वो किसी का पीआरओ बन कर बात न करे।  बात आम जनता के दुःख की हो न कि किसी नेता के दल या छवि को पहुँचती कथित ठेस को लेकर। एक ही बात बार बार दोहराई न जाये। इस में दल और नेतागीरी से ऊपर उठ कर बहस करने वाले को सम्मानित किया जाये और राजनीति करने वाले को नज़र अंदाज़ किया जाये।  इसका लेख जोखा बहुत जल्द सभी के सामने होगा जिसका चयन बाकायदा एक कमेटी करे। 

Saturday, 3 October 2015

श्री मुक्तसर साहिब में धान की खरीद शुरू

डीसी ने कहा किसान फसल सुखा कर लाएं 
श्री मुक्तसर साहिब: 2 अक्टूबर 2015: (अनिल पनसेजा//पंजाब स्क्रीन):
श्री मुक्तसर साहिब की दाना मंडी में धान की खरीद श्री मुक्तसर साहिब के डिप्टी कमिश्नर जसकिरन  सिंह ने की। उनके साथ जिला फ़ूड सप्लाई, मार्कफेड के उच्च अधिकारी और मार्किट कमेटी के अधिकारी भी मौजूद थे।
पूरे भारत में धान की फसल पक्क कर मंडियों में पहुँच चुकी है। हर जगह के किसान अपनी फसल को लेकर मंडियो में आते हैं। हर किसान चाहता है कि उनकी फसल का अच्छा भाव मिले और उनकी फसल जल्दी ही बिक जाये और किसान जल्दी घर वापस जाये ता कि अगली फसल को बोने तियारी करे।  उसे जियादा दिन मंडी न बैठना पड़े इस लिए सरकार की तरफ से धान की फसल की खरीद एक अक्टूबर से शुरू करवा दी गयी है जिसके चलते आज श्री मुक्तसर साहिब की दाना मंडी में भी श्री मुक्त्सर साहिब के डिप्टी कमिश्नर स. जसकरण सिंह ने अपने साथ फ़ूड सप्लाई ,मार्क फेड और मंडी बोर्ड के अधिकारिओ को लेकर धान की फसल की खरीद शुरू करवाई उन्हों ने पात्र करो से बातचीत करते हुए बताया के इस बार किसानो को किसी भी किस्म की परेशानी का सहमना नही करना पड़ेगा फसल की जल्स तुलाई होगी और जल्द ही मॉल की लिफ्टिंग की जाएगी और किसान के पैसे की भी जल्द अदैगी की जाये गी इस के लिए सभी पर्बंध कर लिए गई है ........मगर हम किसानो से अपील करते है के धान की फसल को सुखा के मंडी में लाये और रात के समय धान न काटे ता के धान में नमी कम हो और उन्हें फसल बेचने में कोई दिकत न आये ........
दूसरी तरफ किसानो से पूछा तो उन्हों ने बताया के हमें तीन दिन हो गये अपनी फसल को मंडी में लेकर आये हुए अभी तक फसल की खिरिड नही हुई है और नहीं जहा को पानी आदि का पर्बंध है नहीं आवारा जानवरों के रोकथाम के लिए कोई पर्बंध है ...
 रूप सिंह किसान भंग्जडी और किसान बाल्टर सिंह तामकोट  मुश्किलें भी बतायीं। 
जब इस बारे में मार्किट कमेटी के सेकटरी से पूछा तो उन्हों ने बताया के हमने आवारा जानवरों को मंडी से बहर करने के लिए चार आदमियो को तैनात कर दिया है इस से किसानो की फसल का नुकसान नि होगा ......और किसानो के पिने वाले पानी का भी पर्बंध किया गिया है ..
सचिव गुरचरन सिंह ने अपने प्रबंधों के  बताया। 

Thursday, 3 September 2015

इस बार महिला शक्ति सागर उमड़ के आया हड़ताल में

ट्रेड यूनियन संगठनों ने किया देश भर में सफल हड़ताल का दावा
लुधियाना: 2 सितम्बर 2015: (रेक्टर कथूरिया//जन मीडिया मंच): 
सत्ताधारी भारतीय पार्टी से सबंधित ट्रेड यूनियन भारतीय मज़दूर संगठन के अलग हो जाने के बावजूद  संयुक्त हड़ताल पूरी तरह कामयाब रही।  पंजाब में बाद दोपहर दो बजे तक कारोबार भी ठप्प रहे और आवाजायी भी। शहर के अलग अलग भागों से मज़दूर मार्च करते हुए आये और शहर के केंद्रीय स्थान बस  स्टैंड  हुए। महिलाओं की संख्या  बड़ी थी। यूँ लगता था जैसे महिलाओं  संसार वहां बस गया हो। इनमें हर उम्र की  महिलाएं थीं। महिला शक्ति के जोश का सागर सा लहरा रहा था। आज के मुख्य सम्मेलन का संदेश था कि  सरकार लोगों के गुस्से से सबक सीखे।  
इस मुख्य आयोजन की अध्यक्षता एटक के कामरेड ओम प्रकाश मेहता, सीटू के कामरेड जगदीश चंद, इंटक के कामरेड स्वर्ण सिंह और सी टी यूं के कामरेड परमजीत सिंह ने संयुक्त रूप से की। 
वक्ताओं ने क़र्ज़ के कारण बढ़ रही आत्म हत्याओं पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए  देश की बिगड़ी हुयी हालत की चर्चा की। पैसे  असंतुलन की चर्चा करते हुए कि 100 परिवारों के पास 22 लाख है जबकि देश की 70 फीसदी जनता हर रोज़ केवल 16 रूपये 60 पैसे पर गुज़ारा  है। देश की 30 फीसदी जनता रोटी से भी आतुर है। देश की बहुत बड़ी जन संख्या भूखी मर रही है। ऐ रैली में शर्म कानूनों की भी आलोचना की गयी। 
इस विशाल रैली में उद्द्योगिक मज़दूर, होज़री वर्क्स,रोडवेज कर्मचारी, बिजली मुलाज़िम, बीएसएनएल कर्मी, आशा वर्कर्ज, पी एस एस एफ, नगर निगम मुलाज़िम और असंगठित वर्गों जे कर्मी भी शामिल हुए। इस विशाल रैली को कामरेड  प्रसाद दुबे, बलराम, रमिंद्र सिंह, दलजीत साही, देवराज, सुदेश्वर,समर बहादुर, सुबेग सिंह, मंजीत सिंह, गुरनाम गिल, गुलज़ार गोरिया, विजय कुमार, जेवल कृष्ण, मास्टर फ़िरोज़, लड्डू शाह, कामेश्वर यादव, रमेश रतन,  रोडवेज, गुरबख्श राय,   सिंह सरहली,   ,गुरदीप सिंह कलसी और कई अन्यों  सम्बोधन किया।      

Friday, 28 August 2015

दरिंदगी का शिकार हुई दामिनी को समर्पित कविता//गगनदीप गुप्ता

क्योंकि एक बस चार दरिंदे लिये, शान से चलती गयी
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दिल्ली की वह दरिंदगी भरी वहशियाना वारदात याद आते ही आज भी आम जनमानस के दिलो-दिमाग में एक सिहरन सी दौड़ जाती है। सियासत की अपनी मजबूरियां हो सकती हैं।  कानून के हाथ नियमों से बंधे हो सकते हैं और पुलिस व प्रशासन की अपनी बेबसी हो सकती है। लगता है उसे भुलाया जा रहा है। जानबूझ कर हालात से आँखें मूंदी जा रही हैं।  अगर सबक सीखने वाली करवाई हुई होती तो उसकी मौत के बाद भी यह एह्र्मनाक सिलसिला जारी नहीं रहता। उसके आखिरी दिनों की कल्पना भी बहुत पीड़ा दायिक है।  उस दर्द को महसूस करते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखीं हैं-गगनदीप गुप्ता ने। उन पंक्तियों को हम यहाँ ज्यों का त्यों प्रकाशित कर रहे हैं। आपको यह रचना कैसी लगी अवश्य बताएं। आपके विचारों की इंतज़ार बानी रहेगी। 
आज फिर मेरी कलम चलने को तैयार हो गयी,
लगा उसकी आत्मा वहशीपन का शिकार हो गयी,
मानवता को डस लिया मानवता ने ऐसे,
खून की नलियाँ जैसे ज़हरीला बहाव हो गयीं।

इक मासूम, इक लड़की, तन्हा-ओ-बेबस,
बस इसलिये कर दी गयी,
क्योंकि एक बस चार दरिंदे लिये,
शान से चलती गयी।

न कहूँगा उन्हें जानवर,
कि जानवर तो जान वार देते हैं,
वो चार हैं वही वहशी दरिंदे,
जिन्हें हम समाज में पनाह देते हैं।

बहादुर करार दिया उस मासूम को,
कि वो अब तक मरी नहीं, जली नहीं,
ज़िंदा भी है अब तलक जो,
कि साँसें अभी रुकी नहीं।

इशारों में पुछती है माँ-बाप से,
क्या मिलेगा इंसाफ़ इस दर्द का?
क्या होगा ईलाज इस मर्ज़ का?
कि जागेगी आवाम इस पाप से।

कोख से जन्मे मेरी जो,
मेरा ही दामन दाग़दार कर दिया,
चंद हवस के पुतलों ने,
हर माँ को शर्मसार कर दिया।

सज़ा हो फाँसी या फिर,
नपुंसक हर उस शख़्स को बनाने की,
ज़रुरत है तो बस आज,
और मासूमों की लाज बचाने की।

क्यों न 'गगन' हो कुछ ऐसा कानून,
कि सहर जायें कब्रों के मुर्दे भी,
हर आरोपी का हश्र हो ऐसा,
निकाल दो आँखें, दिल और गुर्दे भी।

एक इल्तज़ाः
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वो जो एक मासूम जान,
लेटी मरणशया पर कराह रही है,
मेरी कलम क्या लिखे और,
सोचकर ही उसकी जान जा रही है।

दुआ है बस दोस्तो!
कर सको तो करो उसके लिये,
वरना तो जीना भी है मुश्किल,
इस जहाँ में खुदा के लिये।
रिंदगी का शिकार हुई दामिनी को समर्पित कविता//गगनदीप गुप्ता 


Tuesday, 14 April 2015

आंबेडकर:धारा 370 को मंजूरी देकर मैं अपने देश से गद्दारी नहीं कर सकता

फेसबुक मीडिया ने टटोले इतिहास के पन्ने
 फेसबुक मीडिया Posted on Tuesday, 14 April 2015 at 12:50  
जब नेहरु ने कश्मीर के प्रमुख नेता शेख अब्दुल्ला को कश्मीर को भारत के अन्य राज्यों की जगह एक विशेष राज्य या एक अलग देश की तरह से मान्यता प्रदान करते हुए विवादित धारा 370 को भारत के संविधान में डलवाने के लिए डॉक्टर अम्बेडकर के पास भेजा तो आंबेडकर ने उस समय जो कहा था वो आज भी पढने योग्य और आँखें खोल देने वाला है
अम्बेडकर ने शेख अब्दुल्ला के मूंह पर कहा था -
'' तो आप चाहते हैं की कश्मीर को सारी सहायता हिन्दुस्तान दे , हर साल करोड़ों रुपैया हिंदुस्तान भेजे , सारे विकास कार्य अपने खर्चे पर हिन्दुस्तान उठाये, कोई भी हमला होने पर इसकी रक्षा हिन्दुस्तान करे और सारे भारत में कश्मीरियों को बराबरी के अधिकार मिलें लेकिन उसी भारत और भारतीयों को कश्मीर में बराबरी का कोई अधिकार ना हो ??
मैं भारत का कानून मंत्री हूँ और इस भारत-विरोधी धारा 370 को मंजूरी देकर कम से कम मैं तो अपने देश से गद्दारी नहीं कर सकता हूँ
नेहरु जी से जाकर कहियेगा की एक देशद्रोही ही इस धारा को भारत के संविधान में डालने की मंजूरी दे सकता है और मैं वो देशद्रोही नहीं हूँ ''
और ये कहकर उन्होनें शेख अब्दुल्ला को अपने ऑफिस से निकाल दिया , आग-बबूला शेख अब्दुल्ला नेहरु के पास पहुंचा और उसे सारी बात बताई
तब नेहरु ने अलोकतांत्रिक तरीके से गोपालस्वामी अयंगर से इस भारत-विरोधी धारा 370 को भारत के संविधान में डलवाया जिसका खामियाजा हमारा भारत देश आजतक भुगत रहा है पाकिस्तान परस्त और गद्दार कश्मीरियों की चोरी और सीनाजोरी के रूप में